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बिहार सरकार की बड़ी पहल: 789 सरकारी स्कूलों में लागू होगी आधुनिक शिक्षा प्रणाली, छात्रों को मिलेगा तकनीकी और कौशल प्रशिक्षण

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पटना: बिहार में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 789 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक सरकारी स्कूलों में आधुनिक शिक्षण व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव पास किया गया। इसके लिए 1,485.85 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षा तक सीमित न रखकर, उन्हें तकनीकी साक्षरता, नवाचार और व्यावसायिक कौशल से लैस करना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप बनाई जा रही है, ताकि बिहार के विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भविष्य के रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
स्कूलों में होंगे ये बदलाव
चयनित 789 स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना की जाएगी, जिससे डिजिटल और इंटरैक्टिव शिक्षा का लाभ छात्रों तक पहुंचे।
विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान और प्रयोगात्मक कौशल को बढ़ाने के लिए साइंस लैब और कंप्यूटर लैब स्थापित की जाएगी।
सभी स्कूलों में आधुनिक लाइब्रेरी की व्यवस्था की जाएगी, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ शोध और अध्ययन के अवसर मिलें।
शिक्षकों को भी मिलेगा प्रशिक्षण
इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ा है। चयनित स्कूलों के शिक्षक नवीनतम शिक्षण तकनीकों और आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों से अवगत होंगे। इससे शिक्षक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में सक्षम होंगे और उन्हें क्रिएटिव थिंकिंग व नवाचार के लिए प्रेरित कर सकेंगे।
छात्रों और भविष्य पर असर
इस पहल से छात्रों में तकनीकी समझ और रोजगारोन्मुख कौशल बढ़ेगा। स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा अब केवल परीक्षा-उन्मुख नहीं रहेगी, बल्कि व्यावहारिक और जीवनोपयोगी भी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बिहार के सरकारी शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और डिजिटल क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
सरकार की नजर दीर्घकालिक सुधार पर
कैबिनेट में इस प्रस्ताव के समर्थन में कहा गया कि यह योजना केवल शिक्षण सामग्री और सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगी। शिक्षकों और विद्यार्थियों की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निगरानी, मूल्यांकन और तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।
इस पहल के तहत बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर नई ऊँचाई पर पहुँचने की उम्मीद है, जिससे राज्य के विद्यार्थी भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

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